राधिके काहे करो हठ री

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 33 of 51

संभु सुर ध्यावैं सदा सेस गुन गावै विधि, पारहू न पावैं जे कहैया बेद बानी के। [1] परम पद पायकै चढ़ायवे कौं लायक हैं, जन सुखदायक सहाय दधि दानी के॥ [2] मुकति के मालिक अतालिक हैं सिद्धन के, दीन प्रतिपालिक रखैया हठी पानी के। [3] जोग जज्ञ जप तप कछूवै न साधे ऐसे, पद अवराधे हम राधे महारानी के॥ [4] - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (55) सनाभु सूर ध्यावैन सदा यही गुण गाते हैं, अगले दिन जो कुछ कहते हैं वही मान्य होता है। [1] जो परम पद पाने के योग्य है, जो लोगों को सुख देता है, जो दाता का सहायक है... [2] मुकाती के स्वामी सिद्धों के अटालिका, दिन के रक्षक, हाथियों और जल के रक्षक हैं। [3].
राधिके काहे करो हठ रीराधिके काहे करो हठ री