राधिके काहे करो हठ री
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 34 of 51
सेवत ललितादिक सखि, जे प्रिय परम प्रवीन।
कोटि कोटि छबि आगरी, सुर मुनि बरनन कीन॥
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (8)
सेवित ललितादिक सखी, प्रिय परम प्रवीण। कोटि कोटि छबि अगारी, सुर मुनि बरनन कीन.. - श्री हाथी जी, श्री राधा सुधा शतक (8)