राधिके काहे करो हठ री
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 35 of 51
श्री बृषभानु-कुमारि के, पग बंदौ कर जोर।
जे निसिबासर उर धरै, ब्रज बसि नंद-किसोर॥
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (1)
श्री बृषभानु-कुमारी, अपने कदम रोकें और जोर से धक्का दें। जे निसिबासर उर धरै, ब्रज बसि नंद-किशोर.. - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (1)