बैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 38 of 51

(कवित्त) अतर पुतायौ मढ्यौ महल सुगन्धन सौं, द्वारे गज मोतिन की तोरनै तनी रहै। [1] चन्दन महल चारु चांदनी चंदोवा लाल, गोपमाल मनी कनी कोरनै घनी रहै॥ [2] उमा चौर ढारै रमा आरती उतारै ठाड़ी, रंभा रति मैनका सी कोटिन जनी रहै। [3] हठी देवतान की दिमाकदार रानी तेऊ, राधे महारानी जू के हाजिर बनी रहै॥ [4] - श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (8) (कविता) अतर पूतयौ मधायौ महल सुगंध सौं, द्वारे गज मोतिन के तोरण खड़े हैं। [1] चंदन महल चारु चंदानी चंदोवा लाल, गोपामल मनि कानी कोरनाई घनी रहि। [2] उमा चौर धरै राम आरती उत्तरै ठाढ़ी, रम्भा रति मैंका सी कोटिन रहे। [3] दीमक रानी टेऊ, हाथी देवतान की राधे महारानी चिड़ियाघर में मौजूद थीं.. [4] - श्री हाथी जी, श्री राधा सुधा शतक (8)
राधिके काहे करो हठ रीबैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में