बैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 43 of 51

(कवित्त) गिरि-पति लागी मेरु मेरुपति लागी भूमि, भूमिपति सेस-कोल कच्छ नीर चारी सौं। [1] दिगपति लागी दिगपालन के हाथ हठी, सुरपति लागी सुरपाल छत्रधारी सौं॥ [2] दानपति करन करन पति लागी बलि, बलिपति लागी कैलास के विहारी सौं। [3] तीनों लोकपति ब्रजपति सौ लागी है, ब्रजपति पति लागी वृषभान की दुलारी सौं॥ [4] - श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (96) (कविता) गिरि-पति लागी मेरु मेरुपति लागी भूमि, भूमिपति शेष-कोल कच्छ नीर चारि सौं। [1] दिगपालन के हाथ से दिगपति को हाथी मिला, सुरपति को छत्र सहित सुरपाल मिला.. [2] दानपति को करण करण मिला, बलिपति को बाली मिला, बलिपति को कैलाश का विहारी सौन मिला। [3] तीनों लोकपति हैं ब्रजपति सौ लागी, ब्रजपति पति लागी हैं वृषभान के प्रिय पुत्र.. [4] - श्री हाथी जी, श्री राधा सुधा शतक (96)
गिरि कीजै गोधन, मयूर कुंजन को मोहिंबैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में