बैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 44 of 51
(कवित्त)
जात रूप तखत पै बैठी रूप रासि राधे,
अंगन की प्रभा प्रभाकर को लजावतीं। [1]
चीर चारु हीर हार हीय पहिराय कर,
भूषन बनाय बाल साजन सजावतीं॥ [2]
अतर गुलाब लै सुगन्धन लगावै सबै,
चन्दन चढ़ाय भाल भौरन भगावतीं। [3]
जोरि जोरि पानि देवतान हूँ की रानी ‘हठी’,
कोटि कोटि कोरनिस झुकि कै बजावतीं॥ [4]
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (25)
(कविता) जाट सिंहासन पर बैठी रूपा राशि, आंगन की शोभा राधे, प्रभाकर को लाजावतिन। [1] अपने बालों को हमेशा खुला रखें और खुद को आभूषणों से सजाएं। [2] हर किसी को गुलाब की खुशबू आती है, भले ही वे सुबह चंदन चढ़ाते हों, भागवतम। [3] जोरी जोरी पानी देवतान हूण की रानी 'हाथी', कोटि कोटि कुरान झुकी की दासी.. [4] - श्री हाथी जी, श्री राधा सुधा शतक (25)