बैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 45 of 51
जब तैं विलोक्यौ तोहि सुन्दर कुँवर कान्ह,
तब ही तें बाको चित्त चंग सो चढ़त हैं। [1]
डोलत फिरत नहीं खोलत हिये की पीर,
मेरी कर तेरी सौंह तो जस पढ़त हैं॥ [2]
तुम तो सुघर स्यानी कहिये सबैई बात,
चलिये जरूर बैठें कहो का कढ़त हैं। [3]
मेटो मन बाधा हठी पूजै मन साधा वे तौ,
रातौ दिन राधा राधा राधा ही रटत हैं॥ [4]
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (54)
आपका दिमाग तभी स्वस्थ होता है जब आप किसी खूबसूरत लड़की को देखते हैं। [1] तुम अपना दर्द मत रोको, जैसा मैं पढ़ता हूं वैसा ही व्यवहार करता हूं.. [2] तुम एक बुद्धिमान व्यक्ति हो, मुझे सब कुछ बताओ, चलो बैठो और कहो कि यह मुश्किल है। [3] मन में हाथी की पूजा होती है, मन उदास होता है, रात्रि में केवल राधा, राधा, राधा का जाप होता है.. [4] - श्री हाथी जी, श्री राधा सुधा शतक (54)