बैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 46 of 51
(कवित्त)
जाके अंग अंग की बनक पै कनक वारै,
मोहै लेत मैन मन मोतिन के हारिए। [1]
ऐसी मन भावनी सौ मोहन जू कीनौ मान,
जाकी ये बड़ाई विधि गावै वेद चारिए॥ [2]
राधे जू को बदन बिलोको व्रजचन्द ‘हठी’,
चन्द जोति मंद नंद नंद पाइ धारिए। [3]
सची मंजु घोष सी सु मैनका तिलोतमा सी,
रम्भा सिवा रति सी रमा सी वारि डारिए॥ [4]
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (41)
(कविता) जब मैं अपने शरीर का हिस्सा बन जाता हूं, तो मैं सुबह अपना दिल खो देता हूं। [1] ऐसा मन है भवानी का, जो मन ही मन वेद गाता है। [2] राधे जू का शरीर व्रजचंद 'हाथी' जैसा है, चंद जोति मंद नंद नंद पै धारी। [3] शची मंजु घोष सी सु मैनका तिलोत्तमा सी, रम्भा शिव रति सी राम सी वारी डारी.. [4] - श्री हाथी जी, श्री राधा सुधा शतक (41)