बैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 48 of 51
(सवैया)
कर कंजन जावक दै रूचि सौं, बिछिया सजि कै ब्रज माड़िली के। [1]
मखतूल गुहे घुँघरू पहिराय, छला छिगुनी चित चाड़िली के॥ [2]
पगजेबै जराब जलूसन की, रवि की किरनै छवि छाड़िली के। [3]
जग वन्दत है जिनको सिगरो, पग बन्दत कीरिति लाड़िली के॥ [4]
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (6)
(सवैया) कर कंजन जावक दा रुचि सौं, बिछिया सज्जि की ब्रज मड़ैली। [1]. (6)