बैठी रंग भरी है रंगीली रंग रावटी में
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 49 of 51
(कवित्त)
कीरति किसोरी वृषभान की दुलारी राधा,
सहज सखीन लै निकुंजन को डगरी। [1]
चरन की चौकी की चमक चारु अंगन की,
कैयो रंग रंगन की जोति ब्रज बगरी॥ [2]
देखै पग द्वारै वारै तन मन प्रान हठी,
रूप चक चौंधा रही चौंक सब नगरी। [3]
कैधौं सुखमा है कै दमा है कै तमा है कै,
उमा है इन्दुमा है कै रमा है रूप आगरी॥ [4]
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (99)
(कविता) कीर्ति किशोरी वृषभान की प्यारी राधा, सहज सखिन लै दगारी निकुंजन। [1] चारु आंगन की चरण चौकी की चमक, ब्रज बागरी के रंग-बिरंगे रंगों की रोशनी.. [2] देखो, हाथी पैरों से तन, मन और प्राण खो रहा है, उसकी सुंदरता से सारा शहर स्तब्ध है। [3] कैधौं सुखमा है कै दमा है कै तम है कै, उमा है इंदुमा है कै राम है रूप अगरी.. [4] - श्री हाथी जी, श्री राधा सुधा शतक (99)