राधिके काहे करो हठ री
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 5 of 51
(कवित्त)
अतर पुतायो चौक चन्दन लिपायो,
बिछी गिलाम गलीचन की पंगत प्रमान की। [1]
काली पीली हरी लाल झालरे झलक रहीं,
जैसे छविछाई चारू चाँदनी वितान की॥ [2]
झीनी श्वेत सारी जड़ी मोतिन किनारीदार,
फैली मुख आभा हठी राधे सुख दान की। [3]
नाह नेह नद्दी कर रमा रूप रद्दी कर,
बैठी आन गद्दी पर बेटी वृषभानु की॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (10)
(कविता) अतर पुत्यो चौक चंदन लिपायो, बिच्छी गिलम गलीछन की पिंगट प्रमाण की पिंगट प्रमाण। [1] काली, पीली, हरी और लाल झालरें चांदनी आकाश की छवि के समान दिखाई दे रही हैं.. [2] सभी पतली और सफेद लटों में मोती की धारियां हैं, हाथी के चेहरे की चमक ने खुशी दी है। [3] राम के रूप को नष्ट मत करो, वृषभानु की बेटी सिंहासन पर बैठी है.. [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (10)