राधिके काहे करो हठ री
Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी
Verse 8 of 51
(सवैया)
चन्द सो आनन कंचन सो तन, हौं लखीकैं बिनमोल बिकानी। [1]
औ अरविन्द सो आँखिन कों 'हठी', देखत मेरी यै आँखी सिरानी॥ [2]
राजति हैं मनमोहन के संग, वारौं मैं कोटि रमारति रानी। [3]
जीवन मूरी सबैं ब्रज को, ठकुरानी हमारी है राधिका रानी॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (82)
(सवैया) चंद सो आनन काचन सो तन, हौं लखिकैन बिनमोल बिकानी। [1] और हाथी जैसी आंखों वाले अरविन्द, मेरी प्यारी सीरानी को देखो.. [2] वह तो मनमोहन की रानी है, लेकिन मैं करोड़ों रामरति की रानी हूं। [3] जीवन मूरि सबैन ब्रज, ठकुरानी हमारी राधिका रानी.. [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (82)