राधिके काहे करो हठ री

Radha Sudha Shataka — श्री हठी जी

Verse 9 of 51

(कवित्त) चंदन लिपायो चौक, चाँदनी चँदोवे तामें, चाँदनी बिछौना फैली लहर सुगंद की। [1] चाँदनी की साज नीकी चंद-सम चमकन, चारों ओर चंद्रमुखी चंद-जोति मंद की॥ [2] चाँदनी-सी चार चारु चाँदनी-सी फैली 'हठी', चाँदनी-सी-हाँसी, कै मिठाई सुधा कंद की। [3] चंदन की चौकी बैठी चंदन लगाय भाल, चंद-से वदन राधे रानी ब्रजचंद की॥ [4] - श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (17) (कविता) चंदन लिपायो चौक, चांदनी चंदोव तमेन, चांदनी बेधौना, खुशबू की लहर फैली। [1] चांदनी साज निकी, चंद्रमा की तरह चमकती, चंद्रमुखी चंदा-जोती पैरों या मांद की.. [2] चारु चांदनी जैसी, फेली 'हाथी' चांदनी जैसी, हांफती चांदनी सी, सुधा कुंड की मिठास। [3] चंदन मंच पर बैठे भाल चंदन और चंदा के साथ राधे रानी ब्रजचंद गा रही हैं.. [4] - श्री हाथी जी, राधा सुधा शतक (17)
राधिके काहे करो हठ रीराधिके काहे करो हठ री