अंग सन्निधानरत्न मंडल प्रमंडिनीम्

Radhashtakam Stotras —

Verse 30 of 35

गोपनागरेन्द्र कत्थितोरि काल कारिणीम्। गानतान मुग्ध कृष्ण वंशिका प्रहारणीम्॥ अंघ्रि मनोज कोटि रूप गर्व नाशिनीम्। राधिका महं भजे निकुञ्ज धाम वासिनीम्॥ - श्री मोहनचंद जी, श्री राधिकाष्टकम (7) गोपानगरेन्द्र सहयोरि कल करिनिम्। ज्ञानं मुग्ध कृष्ण वंशिका प्रहरणीम्..अंगारी मनोज कोटि रूप गर्व नाशिनीम्..राधिका महान् भजे निकुंज धाम वासिनिम्.. - श्री मोहनचंद जी, श्री राधाकाष्टकम् (7)
अंग सन्निधानरत्न मंडल प्रमंडिनीम्अंग सन्निधानरत्न मंडल प्रमंडिनीम्