प्यारी तेरो मानु मनावन आँई
Ras Ke Pada —
Verse 28 of 28
तो सम को प्यारो नहि प्यारी।
तन मन धन तुम प्रान लाल के ससि जिउ सुधा किरणि उजिआरी॥ [1]
जिउ दामुनि बिनु घन की सोभा तैसे तुम बिनु कुंजबिहारी।
बेगि मानु तजि मिलहु लाल सों जिय की जीवनि सोभा न्यारी॥ [2]
तुम हो चतुर प्रवीनि लाडली रूप सिंधु सीवाँ न तिहारी।
केवल रसि मिलु रसु उपजावो उह नटु तूँ वृषभान दुलारी॥ [3]
- श्री केवल राम जी, रास मान के पद (5)
तो सैम से प्यार मत करो, प्रिये। तुम जीवन की जननी हो, तन, मन और धन की ज्योति हो.. [1] तुम चंद्रमा के बिना सुंदरी हो, कुंजबिहारी। बेगी मनु तजी मिल्हु लाल सों जी सोभा न्यारी की जीवनी। [2] तुम चतुर प्रविनि प्रिय रूप सिन्धु सिवान न तिहारी। केवल रसि मिलु रसु उपज्वो उह नातु तू वृषभान दुलारी। [3] - श्री केवल राम जी, रस मन के पद (5)