स्याम सलोनो प्यारो नंद जीउ को नागरु
Ras Ke Pada —
Verse 27 of 28
(राग जयजयवन्ती)
स्याम सलोनो प्यारो नंद जीउ को नागरु
जगत उजागर प्यारी चाहत कुंजन मै। [1]
रटत रहत राधा पल सों न लागे पलु
काहे कों मुनि ले बैसी अपुने भवन मै॥ [2]
करहु तुमारी सोंस उन के मन की सभ
सुधि बुधि हिरि लीनी कंचन से तन मै। [3]
केवलजन लडेती मानु तजि बेगि मिलु
धारो चितु बलि जावो पीय के गवन मै॥ [4]
- श्री केवल राम जी, रास मान के पद (65)
(राग जयजयवंती) स्याम सलोनो प्यारो नंद जिउ को नगरु जगत उजागर प्यारी चाहत कुंजन माई। [1] राधा पाल जपती रहती है, 'नहीं बेटा लागे पलू, कौन सा साधु तेरे घर की गद्दी संभालेगा, मेरी मां.. [2] मैं तेरे लिए ऐसा करूंगा, मेरे बेटे, उसके मन के सभी अच्छे विचार कंचन के हरे बालों में समा जाएंगे। [3] केवलजन लड़ेति मनु तजि बेगि मिलु धरो चितु बाली जावो पिया के गवन माई.. [4] - श्री केवल राम जी, रस मन के पद (65)