हमरे सुख कौ वपु बन्यौ

Ras Ki Sakhi —

Verse 3 of 6

प्रिया आसिक मासूक हम, छिन छिन आनंद देत। कुंजबिहारिनी लाड़िली, अंकौ भरि भरि लेत॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रस की साखी (106) प्रिया असिक मसुक हम, छिन-छिन देत आनंद। कुंजबिहारिणी युद्ध, अनगिनत भारी गीत.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रास की सखी (106)
हमरे सुख कौ वपु बन्यौहमरे सुख कौ वपु बन्यौ