वृन्दावन बसि कष्ट जो होइ, कोटि मुक्ति सुख भुगतै सोइ

Rasik Dev Vani — श्री रसिक देव

Verse 9 of 9

वृन्दावन बसि कष्ट जो होइ, कोटि मुक्ति सुख भुगतै सोइ। दुखी - सुखी वृन्दावन में मरे, जैसे सूर न रण ते टरे॥ - श्री रसिकदेवजी, श्री रसिकदेवजी की वाणी वृन्दावन के लोगों ने अनेक कष्ट सहे और लाखों मुक्तिदायक सुखों का अनुभव किया। वृन्दावन में दुःखी और सुखी मर गये, जैसे तारे नहीं बरसते.. - श्री रसिकदेवजी, श्री रसिकदेवजी के वचन
वृंदावन तजि तीरथ जांही