श्री रसिक देव जी की वाणी

Rasik Dev Vani

श्री रसिक देव · 9 verses · Braj

  1. 1. दूलह दुलहिन अधिक बनी
  2. 2. महल ते निकसी न बाहर आवैं
  3. 3. महल ते निकसी न बाहर आवैं
  4. 4. महल ते निकसी न बाहर आवैं
  5. 5. महल ते निकसी न बाहर आवैं
  6. 6. श्रीबिहारीजू खेलत बसंत
  7. 7. महल ते निकसी न बाहर आवैं
  8. 8. वृंदावन तजि तीरथ जांही
  9. 9. वृन्दावन बसि कष्ट जो होइ, कोटि मुक्ति सुख भुगतै सोइ