बरसानो वृषभानु को, लखी साँकरी खोर।

Rasik Mohini — श्री प्रियादास

Verse 1 of 27

बरसानो वृषभानु को, लखी साँकरी खोर। सखिन सहित श्री लाड़िली, निकसत याही ओर॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (22) वृषभानु बरसे, लखि सांकरि खोर। श्री लाडैली अपनी पत्नी सहित, निकास इसी दिशा में है.. - श्री प्रियादास जी, रोमांटिक मोहिनी (22)
भूतल में वृंदा विपिन, ए सर्वोपरि आहि।