भूतल में वृंदा विपिन, ए सर्वोपरि आहि।

Rasik Mohini — श्री प्रियादास

Verse 2 of 27

भूतल में वृंदा विपिन, ए सर्वोपरि आहि। बड़ी भूल नहिं बस सकै, फिर कव पावै ताहि॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (7) भूतल पुरुष वृंदा विपिन, परम शक्ति। बड़ी गलतियाँ नहीं की जा सकतीं, वे दोबारा मिल जाती हैं.. - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (7) भूतल पर स्थित श्रीधाम वृन्दावन परम विश्राम स्थल है। यदि कोई इस धाम में निवास कर सका तो यह बहुत बड़ी भूल होगी क्योंकि ऐसा अवसर दोबारा कब मिलेगा?
बरसानो वृषभानु को, लखी साँकरी खोर।भूमि सुभग तरु लता छवि, सुधि बुधि सब हर लेत।