मिल्यौ सबै कछु जो कभूँ मान्यौ आपनि हाल।
Rasik Mohini — श्री प्रियादास
Verse 11 of 27
मिल्यौ सबै कछु जो कभूँ मान्यौ आपनि हाल।
जो न मिल्यौ या धाम सौं रह्यौ हीयें दृढ़ साल॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (15)
मिलो सब से, जो मैं कहूँ तू ही समाधान है मेरा। यदि तुम्हें यह स्थान नहीं मिला तो तुम सौ वर्ष तक यहीं रहोगे.. - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (15)