परम रसिकनी लाड़िली, जाको महल रसाल।
Rasik Mohini — श्री प्रियादास
Verse 14 of 27
परम रसिकनी लाड़िली, जाको महल रसाल।
कृपा करै काहू रीति में, तव वन वसै निहाल॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (10)
परम रसिकानि लड़ैली, जाको महल रसाल। प्लीज प्लीज, ये कैसा आदमी है, फिर जंगल कितना सुंदर है.. - श्री प्रियादास जी, रोमांटिक मोहिनी (10)