दरसन मिलवो बोलिवो, रसिक जननि सों होय।
Rasik Mohini — श्री प्रियादास
Verse 4 of 27
दरसन मिलवो बोलिवो, रसिक जननि सों होय।
दुर्लभ जो नहिं पाइये, छिन में पावे सोय॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (12)
दरसन मिल्वो बोलिवो, रसिक ज्ञानी सों होय। जिन लोगों को दुर्लभ नींद नहीं आती थी, वे छिटपुट नींद लेते थे।