भूमि सुभग तरु लता छवि, सुधि बुधि सब हर लेत।

Rasik Mohini — श्री प्रियादास

Verse 3 of 27

भूमि सुभग तरु लता छवि, सुधि बुधि सब हर लेत। अटक परे चित चीकनो, कहूँ चलत नहिं देत॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (13) भूमि सुभग तरु लता छवि, सुधि बुधि सब हर लेत। अब तक तो तुम्हारा मन निर्मल है, कुछ कहूँ तो हिलने नहीं देता.. - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (13) श्री वृन्दावन धाम की भूमि मधुर है, वृक्षों और लताओं की छवि देखकर सुख-दुख मिट जाते हैं। हाँ, यह वृन्दावन का ही प्रभाव है कि मन ऐसे अटक जाता है मानो वृन्दावन के अतिरिक्त उसकी कोई गति ही न हो।
भूतल में वृंदा विपिन, ए सर्वोपरि आहि।दरसन मिलवो बोलिवो, रसिक जननि सों होय।