जब वृन्दावन धाम के प्यारे लागें रूष।
Rasik Mohini — श्री प्रियादास
Verse 6 of 27
जब वृन्दावन धाम के प्यारे लागें रूष।
तब संपति तन भोग करि सब विधि भागी भूष॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (19)
जब तुम्हें वृन्दावन धाम से प्रेम हो जायेगा। तब सनापति सभी अनुष्ठानों में लीन हो गए.. - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (19)