जो है तो में मति कछू, वस वृन्दावन षेत।

Rasik Mohini — श्री प्रियादास

Verse 7 of 27

जो है तो में मति कछू, वस वृन्दावन षेत। सोय रहे हू सेज पर, प्रेम भक्ति हिय देत॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (100) जो मन में हो, वृन्दावन में बस जाओ। मैं शय्या पर सो रहा हूँ, प्रेम भक्ति दे रहा हूँ.. - श्री प्रियादास जी, रोमांटिक मोहिनी (100)
जब वृन्दावन धाम के प्यारे लागें रूष।कौन भूमि की माधुरी, डोलनि परमानंद।