कौन भूमि की माधुरी, डोलनि परमानंद।

Rasik Mohini — श्री प्रियादास

Verse 8 of 27

कौन भूमि की माधुरी, डोलनि परमानंद। कहा कोऊ कवि कहि सकै, जानत श्री ब्रज चंद॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (60) भूमि की मधुरता, प्रेम का आनंद कौन है? कवि जनता से क्या कहें श्री ब्रज चंद.. - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (60)
जो है तो में मति कछू, वस वृन्दावन षेत।खान पान सुख भोग की, जो लों मन में भूख।