प्राणजीवन के नेह में तन मन से रहे चूर

Rasik Pachchisi — श्री रूप माधुरी

Verse 1 of 6

बिना भजन युगलाल के तरै न तरिहैं जान। सब रसिकन के वचन को, येही सत्य प्रमाण॥ - श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, रसिक पच्चीसी (25) भजन युगलाल के बिना घाटी अज्ञात है। यह रसिकन के सभी शब्दों का सच्चा प्रमाण है.. - श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की आवाज, रसिक पचीसी (25)
प्राणजीवन के नेह में तन मन से रहे चूर