प्राणजीवन के नेह में तन मन से रहे चूर

Rasik Pachchisi — श्री रूप माधुरी

Verse 2 of 6

गौर श्याम के प्रेम की, लहर उठै छिन छिन। रूप माधुरी दीनता, भाव बढ़ै दिन दिन॥ - श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, रसिक पच्चीसी (11) गौर श्याम के प्रति प्रेम की लहर ऊपर-नीचे उठती रही। रूप माधुरी दिनता, भव बधाई दिन दिन.. - श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की आवाज, रसिक पचीसी (11)
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