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रसिक पच्चीसी
रसिक पच्चीसी
Rasik Pachchisi
श्री रूप माधुरी · 6 verses · Braj
1. प्राणजीवन के नेह में तन मन से रहे चूर
2. प्राणजीवन के नेह में तन मन से रहे चूर
3. प्राणजीवन के नेह में तन मन से रहे चूर
4. प्राणजीवन के नेह में तन मन से रहे चूर
5. प्राणजीवन के नेह में तन मन से रहे चूर
6. प्राणजीवन के नेह में तन मन से रहे चूर