प्राणजीवन के नेह में तन मन से रहे चूर
Rasik Pachchisi — श्री रूप माधुरी
Verse 6 of 6
श्रीराधा राधा नाम की, रटना जिनके सार।
रूप माधुरी रसिक जन, तिनकी मैं बलिहार॥
- श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, रसिक पच्चीसी (22)
श्रीराधा राधा का नाम है, जिसका सार रत्न है। रूप माधुरी रसिक जन, तिनकी में बलिहार.. - श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की आवाज, रसिक पचीसी (22)