वसिये श्री वृन्दावन धाम

Rasik Vani — रसिक वाणी

Verse 4 of 16

(कवित्त) जप नहीं, तप नहीं, ज्ञान नहीं, ध्यान नहीं, मेरो एक बल प्रभु! तेरो बस नाम है। [1] चाहे सारा जग रूठ जाये भी तो रूठ जाय, मोहि प्रभुवर ! बसु तोहि सो तो काम है॥ [2] रावरो अनूप रूप, चित्त में समायो है, भूलि हौं न ताहि, भूलि सारो धन धाम है। [3] ब्रजके लला ! हे कृष्ण ! त्यागियो न मोहि कभी, तुम्हरे चरण-पद्म मेरो प्रणाम है॥ [4] - रसिक वाणी (कविता) न जप, न तप, न ज्ञान, न ध्यान, मेरा एकमात्र बल भगवान है! यह सिर्फ आपका नाम है. [1] चाहे सारी दुनिया क्रोधित हो जाये, फिर भी क्रोधित ही रहना, हे प्रभु! बसु तोहि सो काम..[2] रावरो अनुप रूप मन में समाया, भूला नहीं मैं भूला सारा धन। [3]ब्रजके लाला! वह कृष्ण! अपने प्रेमी को कभी मत छोड़ो, मैं तुम्हारे चरणों में झुकता हूँ.. [4] - रसिक वाणी
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