वसिये श्री वृन्दावन धाम
Rasik Vani — रसिक वाणी
Verse 5 of 16
जित देखौं तित स्याममई है।
स्याम कुंज बन जमुना स्यामा, स्याम गगन घनघटा छई है॥ [1]
सब रंगन में स्याम भरो है, लोग कहत यह बात नई है।
हौं बौरी, की लोगनहीकी स्याम पुतरिया बदल गई है॥ [2]
चन्द्रसार रबिसाद स्याम है, मृगमद स्याम काम बिजई है।
नीलकंठ को कंठ स्याम है, मनो स्यामता बेल बई है॥ [3]
श्रुति को अच्छर स्याम देखियत, दीपसिखापर स्यामतई है।
नर-देवन की कौन कथा है, अलख-ब्रह्मछबि स्याममई है॥ [4]
- रसिक वाणी
मैं केवल काला देख सकता हूँ। स्याम कुंज बन गई है यमुना स्याम, स्याम गगन सघन है... [1] सब रंगों से स्याम भर गया है, लोग कहते हैं ये नई बात है। हौं बाउरी, वह लोगनहिकि स्याम बदल गई है बेटी में.. [2] चंद्रसर रबिसाद स्याम है, मृगमद स्याम है प्रेम भरा। नीलकंठ कंथा स्यामा हैं, मनो स्यामता बेल बाई हैं.. [3] श्रुति को आचार स्यामा, दीपशिखापर स्यामताई के रूप में देखा जाता है। जो नर-देवन अलख-ब्रह्मचवि श्यामयी की कथा है.. [4] - रसिक वाणी