वसिये श्री वृन्दावन धाम

Rasik Vani — रसिक वाणी

Verse 7 of 16

(कवित्त) काहु को भरोसो है शेष को दिनेश को। काहु को भरोसो है शंकर वरदानी को॥ [1] काहु को भरोसो है उमा, रमा, शारदा को। काहु को भरोसो है दुर्गा भवानी को॥ [2] काहु को भरोसो है रिद्धिन को सिद्धिन को। काहु को भरोसो है जोगी, जति, ज्ञानी को॥ [3] मोहे तो भरोसो है मेरी राधा महारानी को। मोहे तो भरोसो है मेरी राधा महारानी को॥ [4] - रसिक वाणी (कविता) काहू को शेष और दिनेश पर विश्वास है। काहू को भरोसा है शंकर वरदानी पर.. [1] काहू को भरोसा है उमा, रमा, शारदा पर। काहू को भरोसा है दुर्गा भवानी पर.. [2] काहू को भरोसा है रिधिन और सिद्ध को। काहू को जोगी पर भरोसा है, जाति पर भरोसा है, ज्ञान... [3] मोहे को मेरी राधा महारानी पर भरोसा है। मुझे अपनी राधा महारानी पर भरोसा है.. [4] - रसिक वाणी
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