मोहनी मोहन सों रसखानि
Raskhan Ratnavali — श्री रसखान
Verse 10 of 39
(सवैया)
एक सु तीरथ डोलत है, इक बार हजार पुरान बके हैं। [1]
एक लगे जप में तप में, इक सिद्ध समाधिन में अटके हैं॥ [2]
चेत जु देखत हौ रसखान सु, मूढ़ महा सिगरे भटके हैं। [3]
साँचहि वे जिन आपुनपौ यह, स्याम गुपाल पै वारि छके हैं॥ [4]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
(सवैया) सौ ही तीर्थ बचे हैं, हजार पुराण और बचे हैं। [1] जप, तप और ध्यान में लीन, सिद्ध समाधि वाला पुरुष अटका हुआ है.. [2] चेत जू देहात हो रसखान सु, मूरख महा सिगरे हारा। [3] जिन पर अपुनपौ यः, स्याम गुपाल ने आक्रमण किया था। [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली