मोहनी मोहन सों रसखानि

Raskhan Ratnavali — श्री रसखान

Verse 11 of 39

(सवैया) गुञ्ज गरें सिर मोरपखा अरु चाल गयंद की मो मन भावै। [1] साँवरो नन्द कुमार सबै ब्रजमण्डल में ब्रजराज कहावै॥ [2] साज समाज सबै सिरताज, औ लाज की बात नहीं कही आवै। [3] ताहि अहीर की छोहरियाँ, छछिया भरि छाछ पै नाच नचावै॥ [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली (सवैया) गुंज गरें सिर मोरपखा अरु चल गांड की मो मन भावै। [1] संवरो नन्दकुमार, ब्रजमण्डल में सभी को ब्रजराज कहा जाता है। [2] समाज में सभी को राजतिलक प्राप्त है, लज्जा का तो प्रश्न ही नहीं उठता। [3] ताहि अहीर की लड़कियाँ, छिया भरि छ पै नचवै।।[4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली
मोहनी मोहन सों रसखानिमोहनी मोहन सों रसखानि