मोहनी मोहन सों रसखानि
Raskhan Ratnavali — श्री रसखान
Verse 13 of 39
(सवैया)
जो रसना रस ना विलसै, तेहि देहु सदा निज नाम उच्चारन। [1]
मो कत नीकी करै करनी, जो पै कुंज कुटीरन देहु बुहारन॥ [2]
सिद्धि समृद्धि सबै ‘रसखानि’, नहौं ब्रज रेनुका संग सँवारन। [3]
खास निवास मिले तो सही, वही कालिन्दी कूल कदम्ब की डारन॥ [4]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
(सवैया) चाहे कोई भी इन्द्रिय सुख हो या विलासिता, शरीर सदैव मेरा नाम जपता है। [1] मो बिल्ली निक्की करनी, जो पै कुंज कुटिरन देहु बुहारन। [2] सिद्धि और समृद्धि सभी 'रसखानियाँ' नहीं हैं, ब्रज, संवर्णा, रेणुका सहित। [3] यद्यपि विशेष निवास सत्य है, यह कालिंदी कुल कदंब की देन है.. [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली