मोहनी मोहन सों रसखानि
Raskhan Ratnavali — श्री रसखान
Verse 14 of 39
जोहन नन्दकुमार कौ, गई नन्द के गेह।
मोहि देखि मुसकाइ कै, बरस्यौ मेह सनेह॥
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
जोहन नंदकुमार कौ, गै नंद के गेह। तुम मुझे देखकर क्यों मुस्कुराये, प्रेम की वर्षा हुई.. - श्री रसखान, रसखान रत्नावली