मोहनी मोहन सों रसखानि

Raskhan Ratnavali — श्री रसखान

Verse 15 of 39

(कवित्त) कैंधो रसखान रस कोस दृग प्‍यास जानि, आनि के पियूष पूष कीनो बिधि चंद घर। [1] कैंधो मनि मानिक बैठारिबै को कंचन मैं, जरिया जोबन जिन गढ़िया सुघर घर॥ [2] कैंधों काम कामना के राजत अधर चिन्‍ह, कैंधों यह भौर ज्ञान बोहित गुमान हर। [3] एरी मेरी प्‍यारी दुति कोटि रति रंभा की, वारि डारों तेही चित चोरनि चिबुक पर॥ [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली (कविता) कैंधो रसखान रस कोस द्रग पियास जानी, अनी के पीयूष पूस कीनो बिधि चंद घर। [1] मेरे कंधों पर बथ्रिबा के माणिक, काम का माध्यम, माली का घर है.. [2] मेरे कंधों पर, वासना की चांदी की तलहटी, मेरे कंधों पर आज सुबह ज्ञान और गर्व से भरी है। [3] एरी मेरी प्यारी दुती कोटि रति रम्भा की, वारी डारों तेहि चित चोरनी चिबुक पर.. [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली
मोहनी मोहन सों रसखानिमोहनी मोहन सों रसखानि