मोहनी मोहन सों रसखानि
Raskhan Ratnavali — श्री रसखान
Verse 16 of 39
(सवैया)
कौन को लाल सलोनो सखी, वह जाकी बड़ी अँखियाँ अनियारी। [1]
जोहन बंक विसाल के बाननि, वेधत है घत तीछन भारी॥ [2]
रसखानि सम्हारि परै नहिं चोट, सु कोटि उपाय करे सुखकारी। [3]
भाल लिख्यौ विधि हेत को बन्धन, खोलि सकै ऐसो को हितकारी॥ [4]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
(सवैया) कौन है मेरे प्यारे दोस्त, वाह, तुम तो मेरी बड़ी-बड़ी आँखें हो। [1]. [3] यदि आप कानून के लिए लिखते हैं तो भी ऐसे लोगों के हित के लिए बंधन खोले जा सकते हैं.. [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली