मोहनी मोहन सों रसखानि
Raskhan Ratnavali — श्री रसखान
Verse 17 of 39
(सवैया)
खंजन मीन सरोजन को मृग को मद गंजन दीरघ नैना। [1]
कुंजन ते निकस्यौ मुसकात सु पान पर्यो मुख अमृत बैना॥ [2]
जाई रहे मन प्रान विलोचन कानन में रचि मानत चैना। [3]
रसखानि कर्यौ घर मो हिय में निसिवासर एक पलौ निकसे ना॥ [4]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
(सवैया) खंजन मिन सरोजन को मृग को मद गंजन दीर्घ नैना। [1]. [3] रसखानि करयौ घर मो हि मन निसिवसर एक पलौ निकसे ना.. [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली