मोहनी मोहन सों रसखानि

Raskhan Ratnavali — श्री रसखान

Verse 21 of 39

(सवैया) मकराकृत कुण्डल गुंज की माल, के लाल लसै पग पाँवरिया। [1] बछरानि चरावन के मिस भावतो, दै गयौ भावती भाँवरिया॥ [2] रसखानि विलोकत ही सिगरी, भईं बावरिया ब्रज डाँवरिया। [3] सजनी इहिं गोकुल में विष सो, बगरायौ है नन्द के साँवरिया॥ [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली (सवैया) मकरकृत कुंडल गुंज की माल, के लाल लसै पग पंवरिया। [1]. [3] यहां गोकुल में दुल्हन है, विष है, बगरायु नंद का दूल्हा है.. [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली
मोहनी मोहन सों रसखानिमोहनी मोहन सों रसखानि