मोहनी मोहन सों रसखानि
Raskhan Ratnavali — श्री रसखान
Verse 22 of 39
मन लीनों प्यारे चितै, पै छटाँक नहिं देत।
यहै कहा पाटी पढ़ी, दल को पीछो लेत॥
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
प्रिय चीता, मेरा मन मुझे परेशान नहीं करता। हमारे यहां कहा जाता है कि पति पढ़े, नाड़ी देखे.. - श्री रसखान, रसखान रत्नावली