मोहनी मोहन सों रसखानि
Raskhan Ratnavali — श्री रसखान
Verse 26 of 39
(सवैया)
मोरपखा मुरली बनमाल, लख्यौ हिय मैं हियरा उमह्यौ री।
ता दिन ते इन बैरिन कों, कौन न बोल कुबोल सह्यौ री॥ [1]
तौ रसखानि सनेह लग्यौ, कोउ एक कहौ कोउ लाख कह्यौ री।
और तो रँग रहौ न रहौ, इक रंग रंगी सोई रँग रह्यौ री॥ [2]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
(सवैया) मोरपखा मुरली बनमाल, लख्यौ हिय मैं हियारा उमाहयौ री। ता दिन ते ते ऐं बारिन कौन, कौन ना बोले कुबोल सहयौ री.. [1] तू रसखानि सनेह लगायौ री, कोऊ कहौ एक काहू काहू लाखयौ री। और रंग हो या न हो, एक रंगी सोई रंग रहयौ रे.. [2] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली