मोहनी मोहन सों रसखानि
Raskhan Ratnavali — श्री रसखान
Verse 27 of 39
नैन दलालिन चौहटें, मन माणिक पिय हाथ।
रसखान ढोल बजाइके, बेच्यौ हिय जिय साथ॥
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
आँखें दलालों जैसी हैं, हाथ माणिक जैसे हैं। रसखान बजाते हैं ढोल, तुमको बेचते हैं प्राण.. - श्री रसखान, रसखान रत्नावली