मोहनी मोहन सों रसखानि
Raskhan Ratnavali — श्री रसखान
Verse 3 of 39
(सवैया)
अंजन मंजन त्यागौ अली, अंग धारि भभूत करौ अनुरागै। [1]
आपुन भाग कर्यौ सजनी, इन बावरे ऊधौ जू को कहाँ लागै॥ [2]
चाहै सो और सबै करियै, जु कहै रसखान सयानप आगै। [3]
जो मन मोहन ऐसी बसी, तो सबै री कहौ मुख गोरस जागै॥ [4]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
(सवैया) अंजन मंजन त्यागौ अली, अंग धरि भभूत करौ अनुरागाई। [1] भाग जाओगे प्रिये, कहां पाओगे यह मूर्ख.. [2] जो चाहो सो करो, बाकी जैसा रसखान कहें वैसा करो। [3] मन इतना प्रसन्न हो तो सबसे कह दो कि मुख जग गया.. [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली