मोहनी मोहन सों रसखानि

Raskhan Ratnavali — श्री रसखान

Verse 33 of 39

सरस नेह लवलीन नव, द्वै सुजानि रसखानि। ताके आस बिसास सों, पगे प्रान रसखानि॥ - श्री रसखान, रसखान रत्नावली सरस नेह लवलीन नव, द्वै सुजानि रसखानि। बिसास सपूत ले, पृष्ठ प्राण रसखानि.. - श्री रसखान, रसखान रत्नावली
मोहनी मोहन सों रसखानिमोहनी मोहन सों रसखानि