मोहनी मोहन सों रसखानि

Raskhan Ratnavali — श्री रसखान

Verse 34 of 39

(सवैया) शंकर से सुर जाहि भजै, चतुरानन ध्यान में धर्म बढ़ावें। [1] नेक हिये में जो आवतही महाजड़,मूढ़ रसखान कहावैं॥ [2] जा पर सुंदर देववधू नहिं, बारत प्रान अबार लगावैं। [3] ताहि अहीर की छोहरिया छछिया,भरि छाछ पै नाच नचावैं॥ [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली (सवैया) शंकर से सुंग सुर जाहि भजै, चतुरानन ध्यान में धर्म बढ़ाओ। [1] हे नेक हृदय, मैं तुमसे 'मुदा रसखान' कहूँगा। [3] ताहि अहीर की बेटी छिया, नाचूँ मैं भारी.. [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली
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