मोहनी मोहन सों रसखानि

Raskhan Ratnavali — श्री रसखान

Verse 35 of 39

(सवैया) श्री नँदनंदजू आनंद कंद जू, श्री व्रजचंद विहारी की जै जै। [1] नव घनश्याम जू अति अभिराम जू, मन मद मत्त प्रहारी की जै जै॥ [2] गज गति गामिनी प्रीतम भामिनी, गोपिन प्रान पियारी की जै जै। [3] नव रसखान दया की निधान, श्रीवृषभानु दुलारी की जै जै॥ [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली (सवैया) श्री नंदानंदजू आनंद केंद्र जू, श्री व्रजचंद विहारी की जय जय। [1] नव घनश्याम जू अति अभिराम जू, मन मद मत्त प्रहरी की जय जय.. [2] गज गति गामिनी प्रीतम भामिनी, गोपिन प्राण प्यारी की जय जय। [3] नव रसखान दया निधान, श्री वृषभानु दुलारी की जय जय.. [4] - श्री रसखान, रसखान रत्नावली
मोहनी मोहन सों रसखानिमोहनी मोहन सों रसखानि